Sunday, August 30, 2009

Mast Shayari !!!

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बेचनी को बस बादल समझता है
में तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है

की मोह्हबत एक एहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आखों में आंसू है
जो तू समझे तो मोटी है जो न समझे तो पानी है

समंदर पीर का अंदर है लेकिन रो नही सकता
ये आंसू प्यार का मोटी है इसको खो नही सकता
मेरी चाहता को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नही पाया वो तेरा हो नही सकता

भवर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई खवाब पल बैठा तो हंगामा
आभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोह्हबत का
में किस्से को हकीकत में बादल बैठा तो हंगामा

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